निवेदन
विश्व की अठारहवाँ अचरज (!) जैसे आश्चर्य की बात यह है कि मन को समझने के लिये मन का ही सहारा लेना पड़ता है भौतिक या आद्यात्मिक किसी भी प्रकार की प्राप्ति के लिये मन के उपकरण यथायोग्य उपयोग अनिवार्य है। शर्त यह है कि मन पर आपका नियंत्रण होना चाहिये, न कि मन का आप पर।
एक महात्मा के पास एक बार एक मुमुक्षु युवान ज्ञान प्राप्ति के लिये आया। महात्मा ने उससे कहा :’सर्व प्रथम तुम मेरा एक कार्य करो तत्पश्चात ही मैं तुम्हें शिष्य बनाऊँगा। यह एक बक्सा है,उसे दो कोस दूर रहते मेरे मित्र को दे आओ ।’ युवान तुरंत ही बक्सा लेकर चल पड़ा। एक कोस चल कर एक पेड़ के नीचे आराम करने बैठा। आराम करते हुए सोचने लगा, बक्से में क्या है देख लूँ? परंतु उसकी अंतरात्मा ने उसे रोका : नहीं यह किसी की अमानत है, बक्सा नहीं खोल सकता, ज्यों-ज्यों समय बीतता गया,त्यों-त्यों उसकी बक्सा खोलने की ईच्छा तीव्र होती गई। अंततः उसने बक्सा खोल ही दिया। बक्सा खोलते ही उसमें से एक चुहिया कुद कर जंगल में भाग गई। मुमुक्षु डर गया अब मैं महात्मा को क्या जवाब दूँगा?निराश वदन से संत के पास लौटा। महात्मा ने उससे कहा : ‘बक्से में बंद चुहिया तुम्हारे लिये एक अवसर के समान थी,जिसे तुमने गवाँ दिया, तुम्हारी इस निष्पलता का कारण है तुम्हारा मन। तुम में आत्मसंयम की कमी है। अतएव तुम संसार में लौट जाओ तथा संसार के संघर्ष द्वारा संयम रखना सिखो। अपने मन का मालिक बनना पहले सिखो, इसके बिना आध्यात्मिक उपलब्धी संभव नहीं है ।’
पूज्यपाद गुरुवर्य अ. मु. प. पू.श्री नारायणभाई सदैव कहते कि ‘आप के मन को पाताल सदृश महान बनाये सुनी हुई हरेक बात को पचाना सिखीये, जाने हुए रहस्यों को पाताल में दबा दीजिये। यह आत्मसंयम ही आपको आपके मन का मालिक बनायेगा। जीवन के अनेक रंगो के निरीक्षण के पश्चात आज भी यह बात व्यक्ति के लिये इतनी ही संगत लगती है।
मन की मीमांसा को दशिर्त करता यह लघु ग्रंथ ‘मनोयात्रा’ ‘श्रीस्वामिनारायण डिवाइन मिशन’ द्वारा गुरुवर्य अ. मु. प. पू. श्रीनारायणभाई के प्राकट्य दिन पर प्रकाशित होता है, यह उनकी ही प्रसन्नता का परिणाम है। हमें आशा है कि मुमुक्षु को आत्मसंयम से लेकर प्रतिलोम ध्यान तक के सोपान को हाँसिल करने में यह ग्रंथ सहायक होगा।
सवोर्परि भगवान श्री स्वामिनारायण, परम कृपालु बापाश्री महान सद्गुरु श्री तथा वात्सल्य मूतिर् गुरुवर्य अ. मु. प. पू. श्री नारायणभाई की कृपा वर्षा इस प्रकाशन कार्य में उपयोगी सभी पर बरसती रहे ऐसी अभ्यर्थना।
सं. 2063, महा वद चौदश
ई. स. 2007, 16 फरवरी
प्रकाशन समिति
श्री स्वामिनारायण डिवाइन मिशन
अमदावाद