सर्वोपरी भगवान श्री स्वामिनारायण तथा विश्वधर्म

सर्वोपरी भगवान श्री स्वामिनारायण तथा विश्वधर्म

Sarvopari Bhagvan Shri Swaminarayan Tatha Vishwadharma

When Lord Swaminaryan manifested on this earth, people were trapped in various superstitions, malpractices, ill-customs, pseudo-religious rituals. He enabled people to understand true form of religion and to act accordingly. He not only transformed people into human-beings in true sense but also elevated them to attain brahmic state. He charged people with a sense of spiritual fulfilment.
When God manifests on this earth, all of His actions –his daily routine or social activities- are mea...

Contents

  1. आमुख
  2. १. सर्वोपरि भगवान श्री स्वामिनारायण तथा विश्वधर्म
  3. २. श्री स्वामिनारायण का प्रादुर्भाव
  4. ३. बाल्यकाल
  5. ४. निष्क्रमण
  6. ५. वनविचरण एवं भारत परिभ्रमण
  7. ६. दीक्षा
  8. ७. विचारधारा का शुद्धिकरण
  9. ८. वहम तथा भ्रष्टाचार नाबूदी
  10. ९. कुरीति एवं व्यसन से मुक्ति
  11. १०. अहिंसा का बोध
  12. ११. शूद्र जातिओं का उद्धार
  13. १२. भेदभाव के गलत ख्यालों का त्याग
  14. १३. वर्णाश्रम की यथार्थ व्याख्या
  15. १४. सदाव्रत तथा अन्नसत्र
  16. १५. स्त्रियों की उन्नति
  17. १६. ब्रह्मचर्याश्रम का पुनःस्थापन
  18. १७. लूटेरों का सुधार
  19. १८. संघर्ष-विवाद का त्याग
  20. १९. आलस्यप्रमाद रहितता
  21. २०. मानवकल्याण के हेतु मंदिरों की रचना
  22. २१. उत्सव-धार्मिक उत्सव का आयोजन
  23. २२. ललित कलाओं को उत्तेजन
  24. २३. पवित्र शास्त्रों की भेंट
  25. २४. धर्मधुरा की सुपुर्दगी
  26. २५. श्री स्वामिनारायण की व्यक्तिविशेषता
  27. २६. स्वामिनारायण धर्म की विशिष्टताएँ
  28. २७. देशविदेश के समर्थ तत्त्वचिंतक एवं महापुरुष की दृष्टि से श्री स्वामिनारायण एवं स्वामिनारायण धर्म
  29. २८. अब विदेशी महानुभाव श्री स्वामिनारायण के अवतारी कार्य का मूल्यांकन करते हुए क्या कहते हैं वह देखें
  30. २९. स्वामिनारायण में दृष्टिकृत होते परमेश्वर के कल्याणकारी गुण
  31. ३०. सहजानंदस्वामी का अलौकिक प्रभाव तथा ऐश्वर्यदर्शन
  32. ३१. श्री स्वामिनारायण भगवान के प्रादुर्भाव के बारे में शास्त्रों में उल्लेख
  33. ३२. समकालीन महान संत-परमहंसो के स्वानुभव क्या कहते हैं यह देखें -
  34. ३३. भगवान श्री स्वामिनारायण ने दिये हुए दो अभयवचन
  35. ३४. भगवान श्री स्वामिनारायण ने प्रदान किया हुआ सर्वोपरि मंत्र
  36. ३५. भगवान श्री स्वामिनारायण तथा उन्होंने स्थापित किए धर्म के विषय में उपरोक्त समग्र अध्ययन द्वारा निम्नलिखित हकीकत स्पष्ट होती है