८. वहम तथा भ्रष्टाचार नाबूदी

उस काल में धर्म में प्रवेशित छल, कपट, नीतिभ्रष्टता, जडता मिथ्याचार आदि को नाबूद करने के लिये पंचनियम का सर्वत्र प्रचार किया। हजारों लोगों के पास पंचनियम का पालन कराकर उनको दोष रहित किये।

स्वयं की दिव्य प्रभा से तथा उपदेश देने की अद्भुत कला से उन्होंने लोगों को भूत-प्रेत, मंत्रजंत्र के वहम तथा मलिन देव-देवीओं की उपासना से मुक्त करवाया तथा एक भगवान का आश्रय लेने के पश्चात् किसीसे डरना नहीं ऐसा बोधकर उन्हें निर्भय बनाया।