४. निष्क्रमण
इस प्रसंग के पश्चात् वाकई दूसरे ही दिन वैराग्य एवं तपस्या को प्रिय माननेवाले घनश्याम ने संवत 1848 के आषाढ शुकल दसमी ता.29-6-1792 शुक्रवार के दिन ब्राह्ममुहूर्त में किसी को ज्ञात किये बिना स्नान करने के बहाने निज अवतारी कार्य की सिद्धि के हेतु सदा के लिये गृहत्याग किया। यह दिन श्री स्वामिनारायण का निष्क्रमणदिन है।