३४. भगवान श्री स्वामिनारायण ने प्रदान किया हुआ सर्वोपरि मंत्र
समस्त ब्रह्मांडों के नियामक सिर्फ एक पुरुषोत्तम नारायण अर्थात् स्वयं ही हैं, ऐसा ज्ञात करवाकर ‘स्वामिनारायण’ मंत्र दिया तत्पश्चात् बोले कि : ‘सभी क्रिया में मेरी स्मृति रखो; माला मेरे नाम की फेरो; भजन कीर्तन मेरा करो; चरित्र मेरे गाओ; ध्यान मेरे स्वरूप का धरो; सेवा-उपासना मेरी करो। मैं तुम्हें सभी दोषों से मुक्तकर मेरे सर्वोपरि दिव्य सुख की प्राप्ति कराऊँगा।’ सर्वोपरि परमात्मा ही ऐसी कृपावाणी का उच्चारण कर सकते हैं।